विनम्रता और मानवता की मिसाल: डॉ ए.पी.जी. अब्दुल कलाम के जीवन की 5 घटनाएं आपको अवश्य ही प्रेरित करेंगी!

“औसत दर्जे का शिक्षक बताता है, एक अच्छा शिक्षक समझाता है, एक बेहतर शिक्षक प्रदर्शित करता है, लेकिन एक महान शिक्षक प्रेरित करता है|” डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सभी भारतीयों के लिए आशा और सफलता का एक प्रतीक थे| अपने असाधारण चरित्र और महान कर्मों के साथ उन्होंने एक पूरे राष्ट्र के लोगों को राष्ट्रपति के रूप में प्रेरित किया|

आइए पांच उदाहरणों पर गौर करें जिससे डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने हमें सभी को प्रेरित किया|

Credit: The Better India

1. यह घटना तब हुई जब डॉ. कलाम रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organization) के साथ काम कर रहे थे| उन्होंने एक इमारत के परिसर की दीवार को सुरक्षित बनाने के लिए उसपर कांच लगाने के विचार को खारिज कर दिया था| ऐसा करते हुए उन्होंने कहा था, “यदि हम ऐसा करेंगे तो पक्षी आकर इस दीवार पर नहीं बैठ सकेंगे|”

Credit: Youth connect | Representational image

२. कलाम बच्चों के साथ समय बिताने और विचार सांझा करना पसंद करते थे क्योंकि उनका मानना है कि वह बच्चे ही भविष्य में देश का नेतृत्व करेंगे| ऐसी ही एक घटना तब घटी जब एक साधारण स्कूल में भाषण देने से पहले बिजली चले जाने पर कलाम ने मामले को अपने हाथों में ले लिया| वह हॉल के बीचोबीच चले गए और उन्होंने 400 विद्यार्थियों को अपने आस-पास जमा होने के लिए कहा और भाषण दिया|

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3. कलाम ने अपने जीवन की सारी बचत और वेतन को एक ट्रस्ट-Providing Urban Amenities to Rural Areas-PURA (ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करना) को दान में दे दिया| क्यों कि उन्हें पता था कि भारत सरकार देश के राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपतियों का ख्याल रखती है, उन्होंने अपनी सारी संपत्ति ट्रस्ट को दे दी, जो ग्रामीण आबादी के लिए शहरी सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए कड़ी मेहनत करती है|

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4. राष्ट्रपति कलाम स्वयं ही अपने धन्यवाद कार्ड्स लिखने के लिए जाने जाते हैं| कक्षा 6 के एक युवा बच्चे ने डॉ. कलाम की किताब “विंग्स ऑफ फायर” का स्केच बनाया और राष्ट्रपति कलाम को भेज दिया। बदले में, डॉ. कलाम ने उस बच्चे के नाम के साथ एक व्यक्तिगत धन्यवाद कार्ड भेजा था| वह नन्हा बच्चा, नमन नारायण, कलाम द्वारा भेजे गए उस कार्ड को अपनी सबसे कीमती संपत्ति मानता है|

Credit: Youth connect

5. कलाम ने आईआईटी वाराणसी की दीक्षांत समारोह में एक कुर्सी पर बैठने से इंकार कर दिया, जिसे उनके लिए वहां रखा गया था क्योंकि उस कुर्सी का आकार अन्य कुर्सियों की तुलना में बड़ा था| डॉ. कलाम के उस कुर्सी पर बैठने से इनकार करने के बाद उसे तुरंत वहां से हटा दिया गया था|

Credit: IITB | Representational image

हम डॉ. कलाम को एक अनुकरणीय व्यक्ति होने के लिए सलाम करते हैं, जिन्होंने एक पूरे राष्ट्र को अपनी विनम्रता और मानवता के माध्यम से प्रेरित किया था|

 
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